1 दुस्ट मनखेमन के कारन झन चिढ़व
2 काबरकि कांदी के सहीं ओमन अइला जाहीं,
3 यहोवा ऊपर भरोसा रखव अऊ भलई करव;
4 यहोवा के सेवा करे म खुस रहव,
5 यहोवा ला अपन जिनगी सऊंप दे;
6 ओह तोर धरमीपन के ईनाम ला बिहान के अंजोर सहीं,
7 यहोवा के आघू म चुपेचाप रह
8 गुस्सा झन करव अऊ कोप करई ले दूरिहा रहव;
9 काबरकि जऊन मन दुस्ट मनखे अंय, ओमन नास करे जाहीं,
10 थोरकन समय अऊ हे, तब दुस्ट मनखेमन खतम हो जाहीं;
11 पर नम्र मनखेमन देस के वारिस होहीं
12 दुस्टमन धरमी मनखेमन के बिरूध साजिस रचथें
13 पर परभू ह दुस्टमन के ऊपर हंसथे,
14 दुस्टमन अपन तलवार खींचथें,
15 फेर ओमन के तलवार ह ओमन के खुद के हिरदय ला बेधही,
16 धरमी के थोरकन चीज ह
17 काबरकि दुस्टमन के सक्ति ला खतम कर दिये जाही,
18 निरदोस मनखेमन यहोवा के देखरेख म दिन बिताथें,
19 बिपत्ति के बेरा ओमन नइं मुरझांय;
20 पर दुस्टमन नास हो जाहीं:
21 दुस्टमन उधार लेथें अऊ नइं पटांय,
22 जेमन ला यहोवा ह आसीस देथे, ओमन देस के वारिस होहीं,
23 यहोवा ह ओकर पांव ला मजबूत करथे,
24 हालाकि ओह लड़खड़ा सकथे, पर ओह गिरय नइं,
25 मेंह जवान रहेंव अऊ अब डोकरा हो गे हंव,
26 ओमन हमेसा उदार दिल के होथें अऊ दिल खोलके उधार देथें;
27 बुरई ला छोंड़व अऊ भलई करव;
28 काबरकि यहोवा ह सच्चई ले मया करथे
29 धरमी मनखेमन देस के उत्तराधिकारी होहीं
30 धरमीमन के मुहूं ले बुद्धि के बात निकलथे,
31 ओमन के परमेसर के कानून ह ओमन के हिरदय म हवय;
32 दुस्ट मनखे ह ये इरादा से धरमीमन के घात म रहिथे
33 पर यहोवा ह धरमीमन ला दुस्ट मनखेमन के हांथ म नइं छोंड़य
34 यहोवा ऊपर आसा रखव
35 मेंह एक दुस्ट अऊ निरदयी मनखे ला
36 पर ओह जल्दी खतम हो गीस अऊ ओह फेर नइं दिखिस;
37 निरदोस मनखे ऊपर बिचार कर, अऊ ईमानदार मनखे ला देख;
38 पर जम्मो पापीमन ला नास करे जाही;
39 धरमीमन के उद्धार ह यहोवा कोति ले होथे;
40 यहोवा ह ओमन के मदद करथे अऊ ओमन ला छुड़ाथे;