1 हे यहोवा, गुस्सा होके मोला झन फटकार
2 तोर तीरमन मोला छेद डारे हवंय,
3 तोर कोप के कारन मोर देहें ह स्वस्थ नइं ए;
4 मोर अपराध ह मोला बियाकुल कर दे हवय,
5 मोर पाप के मुरूखता के कारन
6 मोला लज्जित करे जाथे अऊ मोला झुकाय गे हवय;
7 मोर पीठ ह चूभत पीरा ले भरे हवय;
8 मेंह कमजोर होके चूर-चूर हो गे हंव;
9 हे परभू, मोर जम्मो ईछा ला तेंह जानत हस;
10 मोर हिरदय ह कुटा-कुटा होवत हे, मोर म ताकत नइं ए;
11 मोर घावमन के कारन मोर संगी-साथीमन मोर ले अलग होवथें;
12 जऊन मन मोला मार डारे चाहथें, ओमन अपन जाल बिछात हवंय,
13 मेंह तो भैंरा मनखे सहीं अंव, जऊन ह सुन नइं सकय,
14 हव, मेंह ओ मनखे सहीं हो गे हंव, जऊन ह नइं सुनय,
15 हे यहोवा, मेंह तोर इंतजार करत हंव;
16 काबरकि मेंह कहेंव, “जब मोर गोड़ ह फिसलथे,
17 काबरकि मेंह गिरनेचवाला हंव,
18 मेंह अपन पाप ला मान लेवत हंव;
19 बहुंते जन बिगर कारन के मोर बईरी हो गे हवंय;
20 जऊन मन मोर भलई करे के कारन मोर बुरई करथें
21 हे यहोवा, मोला झन तियाग;
22 हे मोर परभू अऊ मोर उद्धारकर्ता,