1 दुस्ट मनखेमन के दुस्टता के बारे
2 ओमन खुद ही अपनआप के अतेक बड़ई करथें
3 ओमन के मुहूं ले बुरई अऊ धोखा के बात निकलथे;
4 अऊ त अऊ ओमन अपन दसना म घलो सडयंत्र रचथें;
5 हे यहोवा, तोर मया ह स्वरग तक,
6 तोर धरमीपन ह सबले ऊंच पहाड़ सहीं अय,
7 हे परमेसर, तोर अब्बड़ मया ह अनमोल ए!
8 ओमन तोर घर के भरे भंडार म ले जेवनार करथें;
9 काबरकि तोरेच करा जिनगी के पानी के सोत हवय;
10 जऊन मन तोला जानथें, ओमन ऊपर अपन मया,
11 घमंडी ह मोर ऊपर लात झन उठाय,
12 देखव, दुस्ट काम करइयामन कइसने गिरे-परे हवंय—