1 “यदि कोनो मनखे ह अपन घरवाली ला तियाग देथे
2 “बंजर टीलामन कोति आंखी उठाके देख।
3 एकरसेति, बरसात ला रोक दे गे हवय,
4 का तेंह अभी मोला ये कहिके नइं बलाय:
5 का तेंह हमेसा गुस्सा करत रहिबे?
6 योसियाह राजा के सासन के समय, यहोवा ह मोला कहिस, “का तेंह देखे हस कि बिसवासहीन इसरायल ह का करे हवय? ओह जम्मो ऊंच पहाड़ अऊ जम्मो छायादार रूखमन के खाल्हे म जाके बेभिचार करे हवय।
7 मेंह सोचत रहेंव कि ये जम्मो काम करे बाद, ओह मोर करा लहुंटके आ जाही पर ओह नइं आईस, अऊ ओकर बेईमान बहिनी यहूदा ह येला देखिस हे।
8 मेंह बिसवासहीन इसरायल ला ओकर जम्मो बेभिचार के कारन, ओला तियाग पतर देके भगा दे हंव। तभो ले, मेंह देखेंव कि ओकर बेईमान बहिनी यहूदा म कोनो डर नइं रिहिस; ओह घलो बाहिर जाके बेभिचार करिस।
9 काबरकि इसरायल के छिनारीपन ह ओकर बर नानकून बात रिहिस, एकरसेति ओह देस ला असुध करिस अऊ पथरा अऊ कठवा के संग बेभिचार करिस।
10 ये जम्मो होय के बावजूद, ओकर बेईमान बहिनी यहूदा ह अपन पूरा मन से मोर करा नइं लहुंटिस, पर लहुंटे के सिरिप दिखावा करिस,” यहोवा ह ये घोसना करत हे।
11 यहोवा ह मोला कहिस, “बिसवासहीन इसरायल ह बिसवासघाती यहूदा ले जादा धरमी अय।
12 जा अऊ उत्तर दिग म ये संदेस के घोसना कर:
13 सिरिप अपन दोस ला मान ले—
14 “हे बिसवासहीन मनखेमन मोर करा लहुंट आवव,” यहोवा ह ये घोसना करत हे, “काबरकि मेंह तुम्हर घरवाला अंव। मेंह तुमन ला चुनहूं—एक नगर ले एक झन अऊ एक बंस ले दू झन—अऊ तुमन ला सियोन म लानहूं।
15 तब मेंह अपन मन मुताबिक तुमन ला चरवाहा दूहूं, जऊन मन गियान अऊ समझ के संग तुम्हर अगुवई करहीं।
16 ओ दिनमन म, जब तुम्हर गनती ह देस म बढ़ जाही,” यहोवा ह ये घोसना करत हे, “मनखेमन फेर ये नइं कहिहीं, ‘यहोवा के करार के सन्दूक।’ ये बात ह ओमन के मन म कभू नइं आही या येला ओमन कभू सुरता नइं करहीं; ओकर कमी महसूस नइं होही, अऊ न ही दूसरा बनाय जाही।
17 ओ बेरा म, ओमन यरूसलेम ला यहोवा के सिंघासन कहिहीं, अऊ जम्मो जाति के मनखेमन यहोवा के नांव ला आदर देय बर यरूसलेम म जूरहीं। ओमन अपन पापी हिरदय के ढीठपन के पाछू फेर नइं चलहीं।
18 ओ दिनमन म, यहूदा के मनखेमन इसरायल के मनखेमन संग मिल जाहीं, अऊ ओमन एक संग उत्तर दिग के एक देस ले ओ देस म आहीं, जेला मेंह तुम्हर पुरखामन ला एक उत्तराधिकार के रूप म देय रहेंव।
19 “मेंह खुद कहेंव,
20 पर जइसने ओ माईलोगन, जऊन ह अपन घरवाला संग बिसवासघात करथे,
21 बंजर टीलामन ले एक अवाज आवथे,
22 “हे बिसवासहीन मनखेमन, लहुंट आवव;
23 सच म पहाड़ी अऊ पहाड़मन म
24 हमर जवानी के समय ले ओ कलंकित देवतामन
25 आवव, हमन लज्जित होके लेट जावन,