1 यहोवा के ये बचन मोर करा आईस:
2 “जा अऊ यरूसलेम के सुनत म घोसना कर:
3 इसरायल ह यहोवा बर पबितर,
4 हे याकूब के संतानमन, हे इसरायल के बंस के मनखेमन,
5 यहोवा ह ये कहत हे:
6 ओमन ये नइं पुछिन, ‘यहोवा ह कहां हवय,
7 मेंह तुमन ला ये उपजाऊ देस म ले आनेंव
8 पुरोहितमन घलो नइं पुछिन,
9 “एकरसेति मेंह तुम्हर ऊपर फेर दोस लगाथंव,”
10 कित्ती के समुंदर तीर के ओ पार जावव अऊ देखव,
11 का कोनो देस ह अपन देवतामन ला बदले हवय?
12 हे अकासमन, येला देखके डरव,
13 “मोर मनखेमन दू ठन पाप करे हवंय:
14 का इसरायल एक सेवक अय, जनम ले एक गुलाम अय?
15 सिंहमन गरजे हवंय;
16 मेमफीस अऊ तहपनहेस सहर के मनखेमन घलो
17 जब यहोवा तोर परमेसर ह तोला रसता म ले चलिस,
18 अब नील नदी के पानी पीये बर
19 तोर दुस्टता ह तोला दंड दीही;
20 “बहुंत पहिले तेंह अपन जुड़ा ला टोर डारे
21 मेंह तोला अपन पसंद के अंगूर,
22 हालाकि तेंह अपनआप ला साबुन ले धोथस
23 “तेंह कइसे कह सकथस, ‘मेंह असुध नइं होय हंव;
24 तेंह सुन्ना जगह म जाय के आदि एक जंगली गदही अस,
25 जब तक तेंह खाली गोड़ नइं अस अऊ तोर गला ह नइं सूखाय हे,
26 “जइसने कि चोर ह पकड़े जाय ले कलंकित होथे,
27 ओमन कठवा ला कहिथें, ‘तेंह मोर ददा अस,’
28 त ओ देवतामन कहां हवंय, जेमन ला तुमन अपन बर बनाय हवव?
29 “तुमन मोर ऊपर काबर दोस लगाथव?
30 “मेंह बेकार म तुम्हर मनखेमन ला दंड देंव;
31 “ये पीढ़ी के मनखेमन, तुमन यहोवा के बचन म धियान देवव:
32 का एक जवान माईलोगन ह अपन जेवर,
33 मया लगाय बर तेंह कइसे बने चाल चलथस!
34 तोर कपड़ा म,
35 तेंह कहिथस, ‘मेंह निरदोस अंव;
36 अपन चालचलन ला बदलके,
37 निरासा म अपन मुड़ ला हांथ म धरे