1 तब तेमान के रहइया एलीपज ह कहिस:
2 “कहूं कोनो तोर ले दू सबद कहय, त का तेंह तमक जाबे?
3 सोच, तेंह कतेक झन ला सिकछा दे हवस,
4 तोर बचन ह ओमन ला सहारा देय हवय, जऊन मन लड़खड़ावत रिहिन;
5 फेर अब दुख ह तोर ऊपर आवत हे, अऊ तेंह निरास होवत हस;
6 का परमेसर के भक्ति ही तोर भरोसा
7 “बिचार कर: कोन ह निरदोस होके कभू नास होय हवय?
8 जइसने कि मेंह देखे हंव, जऊन मन बुरई ला जोतथें
9 परमेसर के सांस ले ही ओमन नास हो जाथें;
10 सेरमन गरजथें अऊ गुर्राथें,
11 सिकार के कमी के कारन सेर ह मर जाथे,
12 “एक ठन गोठ मोला गुपत म बताय गीस,
13 रथिया बियाकुल करइया सपनामन के बीच म,
14 तभे डर अऊ कंपकपी ह मोर म हमा गीस
15 एक आतमा ह मोर चेहरा के सामने ले होके गीस,
16 ओह रूक गीस,
17 ‘का नासमान मनखे ह परमेसर ले जादा धरमी हो सकथे?
18 कहूं परमेसर ह अपन सेवकमन ऊपर भरोसा नइं करय,
19 त फेर ओमन के का होही, जऊन मन माटी के घरमन म रहिथें,
20 बिहान अऊ संझा के बीच म ओमन ला कुटा-कुटा करे जाथे;
21 का ओमन के जिनगी के डेरा के डोरीमन ला नइं खींच दिये जावय,