1 “यदि तोर ईछा हवय, त पुकार, पर तोला कोन जबाब दीही?
2 तमकई ह तो मुरूख मनखे ला मार डारथे,
3 मेंह खुद मुरूख मनखे ला बढ़त देखे हंव,
4 ओकर लइकामन सुरकछित नइं एं,
5 भूखहा मनखेमन ओकर फसल ला खा जाथें,
6 काबरकि बिपत्ति ह माटी ले नइं उपजय,
7 जइसे चिंगारीमन ऊपर कोति ही उड़थें,
8 “पर यदि मेंह तोर स्थिति म होतेंव, त में परमेसर ले पराथना करतेंव;
9 ओह अद्भूत काम करथे, जेला समझे नइं जा सकय
10 ओह धरती म बारिस करथे;
11 छोटे मनखेमन ला ओह ऊंचहा जगह म बईठारथे,
12 ओह चतुरामन के योजना ला बिफल कर देथे,
13 ओह बुद्धिमानमन ला ओहीचमन के चतुरई म फंसो देथे,
14 दिन म ही ओमन के ऊपर अंधियार छा जाथे;
15 ओह जरूरतमंद मनखेमन ला ओमन के बोली के चोखा तलवार ले बचाथे;
16 एकरसेति गरीबमन ला आसा होथे,
17 “धइन अय ओ मनखे, जऊन ला परमेसर ह सुधारथे;
18 काबरकि ओह चोट पहुंचाथे, पर ओहीच ह पट्टी घलो बांधथे;
19 छै बिपत्तिमन ले ओह तोला छोंड़ाही;
20 दुकाल म ओह तोला मिरतू ले,
21 तेंह जीभ ले निकले बचन के मार ले बचाय जाबे,
22 तेंह बिनास अऊ दुकाल के बेरा म हंसबे,
23 काबरकि मैदान के पथरामन संग तोर एक करार होही,
24 तेंह जानबे कि तोर डेरा ह कुसल हवय;
25 तेंह ये घलो जानबे कि तोर लइकामन अब्बड़ होहीं,
26 जइसे कि समय म बीड़ा ला खरही गांजे जाथे,
27 “हमन येला परखके देख डारे हन, अऊ येह सच अय।