1 ओ दिन,
2 ओ दिन—
3 में, यहोवा ह येकर रकछा करथंव;
4 मेंह गुस्सा नइं करत हंव।
5 या फेर ओमन मोर मेर सरन लेय बर आवंय;
6 अवइया दिनमन म याकूब ह जरी धरही,
7 का यहोवा ह ओला वइसने मारिस
8 लड़ई अऊ बंधुवई के दुवारा तें ओकर संग लड़—
9 तब एकर दुवारा, याकूब के अधरम के पछताप करे जाही,
10 काबरकि गढ़वाला नगर निरजन हो गे हवय,
11 जब येकर छोटे डंगालीमन सूख जाथें, त ओमन टूट जाथें
12 ओ दिन यहोवा ह फरात नदी ले लेके मिसर के नरवा तक अपन अनाज ला पछिनही, अऊ हे इसरायलीमन, तुमन एक-एक करके इकट्ठा करे जाहू।
13 अऊ ओ दिन एक बड़े तुरही फूंके जाही। जेमन अस्सूर देस म नास होवत रिहिन अऊ जेमन मिसर देस म बंधुवई म रिहिन, ओमन आहीं अऊ यरूसलेम म पबितर पहाड़ ऊपर यहोवा के अराधना करहीं।