1 ओ मुकुट ऊपर हाय, जऊन ह एपरैम के मतवारमन के घमंड अय,
2 देखव, परभू करा एक झन हवय, जऊन ह बलवान अऊ मजबूत हे।
3 एपरैम के मतवारमन के घमंड के ओ मुकुट ला
4 ओ मुरझावत फूल, ओकर महिमामय सुघरता,
5 ओ दिन सर्वसक्तिमान यहोवा ह
6 ओह ओकर बर नियाय के एक आतमा होही
7 अऊ येमन घलो अंगूर के मंद पीके डगमगाथें
8 जम्मो मेजमन उल्टी ले भरे हवंय
9 “येह कोन ए, जेला ओह सिखाय के कोसिस करत हे?
10 काबरकि येह अय:
11 तब बहुंत अछा, परदेसी भासा अऊ अनजान बोली के संग
12 जऊन मन ला ओह कहिस,
13 एकरसेति, यहोवा के बचन ह ओमन बर बन जाही:
14 येकर कारन, हे ठट्ठा करइयामन,
15 तुमन ये डींग मारथव, “हमन मऊत के संग करार करे हन,
16 एकरसेति परमपरधान यहोवा ह ये कहत हे:
17 मेंह नियाय ला नापे के डोरी
18 मऊत के संग तुम्हर करार ह टूट जाही;
19 जब-जब भी येह आही, येह तुमन ला दूरिहा ले जाही;
20 बिछौना ह हांथ-गोड़ फईलाय बर बहुंत छोटे हे,
21 काबरकि यहोवा ह वइसन उठके ठाढ़ होही,
22 एकरसेति अब तुमन ठट्ठा झन करव,
23 धियान दव अऊ मोर अवाज ला सुनव,
24 का कोनो किसान बीज बोय बर नांगर जोतथे, त का लगातार जोतत रहिथे?
25 जब ओह भुइयां ला समतल कर लेथे,
26 ओकर परमेसर ह ओला
27 अजवाईन ला बेलन चलाके नइं मिंजे जावय,
28 रोटी बनाय बर अनाज ला पीसना जरूरी अय;
29 ये जम्मो चीज घलो सर्वसक्तिमान यहोवा करा ले आथे,