1 याहवेह, आपने अपने देश पर कृपादृष्टि की है;
2 आपने अपनी प्रजा के अपराध क्षमा कर दिए हैं
3 आपने अपना संपूर्ण कोप शांत कर दिया
4 परमेश्वर, हमारे उद्धारकर्ता, हमारी समृद्धि पुनःस्थापित कर दीजिए,
5 क्या हमारे प्रति आपका क्रोध सदैव स्थायी रहेगा?
6 क्या आप हमें पुनः जिलाएंगे नहीं,
7 याहवेह, हम पर अपना करुणा-प्रेम प्रदर्शित कीजिए,
8 जो कुछ याहवेह परमेश्वर कहेंगे, वह मैं सुनूंगा;
9 इसमें कोई संदेह नहीं कि उनकी ओर से उद्धार उन्हीं के लिए निर्धारित है,
10 करुणा-प्रेम तथा सच्चाई आपस में मिल गई हैं;
11 पृथ्वी से सच्चाई उगती रही है,
12 इसमें कोई संदेह नहीं कि याहवेह वही प्रदान करेंगे, जो उत्तम है,
13 धार्मिकता आगे-आगे चलेगी