Isaías 58

HINCV

1 “ऊंचे स्वर में नारा

2 यह सब होने पर भी वे दिन-प्रतिदिन मेरे पास आते;

3 ‘ऐसा क्यों हुआ कि हमने उपवास किया,

4 तुम यह समझ लो कि तुम उपवास भी करते हो तथा इसके साथ साथ वाद-विवाद,

5 क्या ऐसा होता है उपवास,

6 “क्या यही वह उपवास नहीं, जो मुझे खुशी देता है:

7 क्या इसका मतलब यह नहीं कि तुम भूखों को अपना भोजन बांटा करो

8 जब तुम यह सब करने लगोगे तब तुम्हारा प्रकाश चमकेगा,

9 उस समय जब तुम याहवेह की दोहाई दोगे, तो वह उसका उत्तर देंगे;

10 जब तुम भूखे की सहायता करोगे

11 याहवेह तुझे लगातार लिये चलेगा;

12 खंडहर को तेरे वंश के लिये फिर से बसायेंगे

13 “यदि तुम शब्बाथ दिन को अशुद्ध न करोगे,

14 तू याहवेह के कारण आनंदित होगा,

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