1 “ऊंचे स्वर में नारा
2 यह सब होने पर भी वे दिन-प्रतिदिन मेरे पास आते;
3 ‘ऐसा क्यों हुआ कि हमने उपवास किया,
4 तुम यह समझ लो कि तुम उपवास भी करते हो तथा इसके साथ साथ वाद-विवाद,
5 क्या ऐसा होता है उपवास,
6 “क्या यही वह उपवास नहीं, जो मुझे खुशी देता है:
7 क्या इसका मतलब यह नहीं कि तुम भूखों को अपना भोजन बांटा करो
8 जब तुम यह सब करने लगोगे तब तुम्हारा प्रकाश चमकेगा,
9 उस समय जब तुम याहवेह की दोहाई दोगे, तो वह उसका उत्तर देंगे;
10 जब तुम भूखे की सहायता करोगे
11 याहवेह तुझे लगातार लिये चलेगा;
12 खंडहर को तेरे वंश के लिये फिर से बसायेंगे
13 “यदि तुम शब्बाथ दिन को अशुद्ध न करोगे,
14 तू याहवेह के कारण आनंदित होगा,