1 हे परमेश्वर, मुझको मेरी सब विपतियों से बचा!
2 कुछ भी नहीं है जिस पर मैं खड़ा हो जाऊँ।
3 सहायता को पुकारते मैं दुर्बल होता जा रहा हूँ।
4 मेरे शत्रु! मेरे सिर के बालों से भी अधिक हैं।
5 हे परमेश्वर, तू तो जानता है कि मैंने कुछ अनुचित नहीं किया।
6 हे मेरे स्वमी, हे सर्वशक्तिमान यहोवा, तू अपने भक्तों को मेरे कारण लज्जित मत होने दें।
7 मेरा मुख लाज से झुक गया।
8 मेरे ही भाई, मेरे साथ यूँ ही बर्ताव करते हैं। जैसे बर्ताव किसी अजनबी से करते हों।
9 तेरे मन्दिर के प्रति मेरी तीव्र लगन ही मुझे जलाये डाल रही है।
10 मैं तो पुकारता हूँ और उपवास करता हूँ,
11 मैं निज शोक दर्शाने के लिए मोटे वस्रों को पहनता हूँ,
12 वे जनता के बीच मेरी चर्चायें करतें,
13 हे यहोवा, जहाँ तक मेरी बात है, मेरी तुझसे यह विनती है कि
14 मुझको दलदल से उबार ले।
15 बाढ की लहरों को मुझे डुबाने न दे।
16 हे यहोवा, तेरी करूण खरी है। तू मुझको निज सम्पूर्ण प्रेम से उत्तर दे।
17 अपने दास से मत मुख मोड़।
18 आ, मेरे प्राण बचा ले।
19 तू मेरा निरादर जानता है।
20 निन्दा ने मुझको चकनाचूर कर दिया है!
21 उन्होंने मुझे विष दिया, भोजन नहीं दिया।
22 उनकी मेज खानों से भरी है वे इतना विशाल सहभागिता भोज कर रहे हैं।
23 वे अंधे हो जायें और उनकी कमर झुक कर दोहरी हो जाये।
24 ऐसे लगे कि उन पर
25 उनके घरों को तू खाली बना दे।
26 उनको दण्ड दे, और वे दूर भाग जायें।
27 उनके बुरे कर्मों का उनको दण्ड दे, जो उन्होंने किये हैं।
28 जीवन की पुस्तक से उनके नाम मिटा दे।
29 मैं दु:खी हूँ और दर्द में हूँ।
30 मैं परमेश्वर के नाम का गुण गीतों में गाऊँगा।
31 परमेश्वर इससे प्रसन्न हो जायेगा।
32 अरे दीन जनों, तुम परमेश्वर की आराधना करने आये हो।
33 यहोवा, दीनों और असहायों की सुना करता है।
34 हे स्वर्ग और हे धरती,
35 यहोवा सिय्योन की रक्षा करेगा!
36 उसके सेवकों की संताने उस धरती को पायेगी।