1 हे परमेश्वर, उठ, अपने शत्रु को तितर बितर कर।
2 जैसे वायु से उड़ाया हुआ धुँआ बिखर जाता है,
3 परमेश्वर के साथ सज्जन सुखी होते हैं, और सज्जन सुखद पल बिताते।
4 परमेश्वर के गीत गाओ। उसके नाम का गुणगान करों।
5 परमेश्वर अपने पवित्र मन्दिर में,
6 जिसका कोई घर नहीं होता, ऐसे अकेले जन को परमेश्वर घर देता है।
7 हे परमेश्वर, तूने निज भक्तों को मिस्र से निकाला
8 इस्राएल का परमेश्वर जब सिय्योन पर्वत पर आया था,
9 हे परमेश्वर, वर्षा को तूने भेजा था,
10 उसी धरती पर तेरे पशु वापस आ गये।
11 परमेश्वर ने आदेश दिया
12 “बलशाली राजाओं की सेनाएं इधर—उधर भाग गयी!
13 वे चाँदी से मढ़े हुए कबुतर के पंख पायेंगे।
14 परमेश्वर ने जब सल्मूल पर्वत पर शत्रु राजाओं को बिखेरा,
15 बाशान पर्वत, महान पर्वत है,
16 बाशान पर्वत, तुम क्यों सिय्योन पर्वत को छोटा समझते हो
17 यहोवा पवित्र पर्वत सिय्योन पर आ रहा है।
18 वह ऊँचे पर चढ़ गया।
19 यहोवा के गुण गाओ!
20 वह हमारा परमेश्वर है।
21 परमेश्वर दिखा देगा कि अपने शत्रुओं को उसने हरा दिया है।
22 मेरे स्वमी ने कहा, “मैं बाशान से शत्रु को वापस लाऊँगा,
23 ताकि तुम उनके रक्त में विचर सको,
24 लोग देखते हैं, परमेश्वर को विजय अभियान की अगुवाई करते हुए।
25 आग—आगे गायकों की मण्डली चलती है, पीछे—पीछे वादकों की मण्डली आ रही हैं,
26 परमेश्वर की प्रशंसा महासभा के बीच करो!
27 छोटा बिन्यामीन उनकी अगुवायी कर रहा है।
28 हे परमेश्वर, हमें निज शक्ति दिखा।
29 राजा लोग, यरूशलेम में तेरे मन्दिर के लिए
30 उन “पशुओं” से काम वांछित कराने के लिये निज छड़ी का प्रयोग कर।
31 तू उनसे मिस्र से धन मँगवा ले।
32 धरती के राजाओं, परमेश्वर के लिए गाओं!
33 परमेश्वर के लिए गाओ! वह रथ पर चढ़कर सनातन आकाशों से निकलता है।
34 इस्राएल का परमेश्वर तुम्हारे किसी भी देवों से अधिक बलशाली है।
35 परमेश्वर अपने मन्दिर में अदृभुत है।