1 हे सिय्योन के परमेश्वर, मैं तेरी स्तुती करता हूँ।
2 मैं तेरे उन कामों का बखान करता हूँ, जो तूने किये हैं। हमारी प्रार्थनायें तू सुनता रहता हैं।
3 जब हमारे पाप हम पर भारी पड़ते हैं, हमसे सहन नहीं हो पाते,
4 हे परमेश्वर, तूने अपने भक्त चुने हैं।
5 हे परमेश्वर, तू हमारी रक्षा करता है।
6 परमेश्वर ने अपनी महाशक्ति का प्रयोग किया और पर्वत रच डाले।
7 परमेश्वर ने उफनते हुए सागर शांत किया।
8 जिन अद्भुत बातों को परमेश्वर करता है, उनसे धरती का हर व्यक्ति डरता है।
9 पृथ्वी की सारी रखवाली तू करता है।
10 जुते हुए खेतों पर वर्षा कराता है।
11 तू नये साल का आरम्भ उत्तम फसलों से करता है।
12 वन औक पर्वत दूब घास से ढक जाते हैं।
13 भेड़ों से चरागाहें भर गयी।