1 हे यहोवा, तू मुझ पर क्रोधित होकर मेरा सुधार मत कर।
2 हे यहोवा, मुझ पर दया कर।
3 मेरी समूची देह थर—थर काँप रही है।
4 हे यहोवा, मुझ को फिर से बलवान कर।
5 मरे हुए लोग तुझे अपनी कब्रों के बीच याद नहीं करते हैं।
6 हे यहोवा, सारी रात मैं तुझको पुकारता रहता हूँ।
7 मेरे शत्रुओं ने मुझे बहुतेरे दु:ख दिये।
8 अरे ओ दुर्जनों, तुम मुझ से दूर हटो।
9 मेरी विनती यहोवा के कान तक पहुँच चुकी है
10 मेरे सभी शत्रु व्याकुल और आशाहीन होंगे।