1 हे मेरे यहोवा परमेश्वर, मुझे तुझ पर भरोसा है।
2 यदि तू मुझे नहीं बचाता तो मेरी दशा उस निरीह पशु की सी होगी, जिसे किसी सिंह ने पकड़ लिया है।
3 हे मेरे यहोवा परमेश्वर, कोई पाप करने का मैं दोषी नहीं हूँ। मैंने तो कोई भी पाप नहीं किया।
4 मैंने अपने मित्रों के साथ बुरा नहीं किया
5 किन्तु एक शत्रु मेरे पीछे पड़ा हुआ है।
6 यहोवा उठ, तू अपना क्रोध प्रकट कर।
7 हे यहोवा, लोगों का न्याय कर।
8 हे यहोवा, न्याय कर मेरा,
9 दुर्जन को दण्ड दे
10 जिन के मन सच्चे हैं, परमेश्वर उन व्यक्तियों की सहायता करता है।
11 परमेश्वर उत्तम न्यायकर्ता है।
14 कुछ ऐसे लोग होते हैं जो सदा कुकर्मों की योजना बनाते रहते हैं।
15 वे दूसरे लोगों को जाल में फँसाने और हानि पहुँचाने का यत्न करते हैं।
16 वे अपने कर्मों का उचित दण्ड पायेंगे।
17 मैं यहोवा का यश गाता हूँ, क्योंकि वह उत्तम है।