1 हे परमेस्वर, एक मनुष्य है जो तेरी अनुसरण नहीं करता वह मनुष्य दुष्ट है और झूठ बोलता है।
2 हे परमेस्वर, तू ही मेरा शरणस्थल है!
3 हे परमेश्वर, तू अपनी ज्योति और अपने सत्य को मुझ पर प्रकाशित होने दे।
4 मैं तो परमेस्वर की वेदी के पास जाऊँगा।
5 मैं इतना दु:खी क्यों हुँ?