Salmos 42

HIN2010

1 जैसे एक हिरण शीतल सरिता का जल पीने को प्यासा है।

2 मेरा प्राण जीवित परमेश्वर का प्यासा है।

3 रात दिन मेरे आँसू ही मेरा खाना और पीना है!

4 सो मुझे इन सब बातों को याद करने दे। मुझे अपना हृदय बाहर ऊँडेलने दे।

7 जैसे सागर से लहरे उठ उठ कर आती हैं।

8 यदि हर दिन यहोवा सच्चा प्रेम दिखएगा, फिर तो मैं रात में उसका गीत गा पाऊँगा।

9 मैं अपने परमेश्वर, अपनी चट्टान से बातें करता हूँ।

10 मेरे शत्रुओं ने मुझे मारने का जतन किया।

11 मैं इतना दुखी क्यों हूँ?

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