1 जैसे एक हिरण शीतल सरिता का जल पीने को प्यासा है।
2 मेरा प्राण जीवित परमेश्वर का प्यासा है।
3 रात दिन मेरे आँसू ही मेरा खाना और पीना है!
4 सो मुझे इन सब बातों को याद करने दे। मुझे अपना हृदय बाहर ऊँडेलने दे।
7 जैसे सागर से लहरे उठ उठ कर आती हैं।
8 यदि हर दिन यहोवा सच्चा प्रेम दिखएगा, फिर तो मैं रात में उसका गीत गा पाऊँगा।
9 मैं अपने परमेश्वर, अपनी चट्टान से बातें करता हूँ।
10 मेरे शत्रुओं ने मुझे मारने का जतन किया।
11 मैं इतना दुखी क्यों हूँ?