Salmos 40

HIN2010

1 यहोवा को मैंने पुकारा। उसने मेरी सुनी।

2 यहोवा ने मुझे विनाश के गर्त से उबारा।

3 यहोवा ने मेरे मुँह में एक नया गीत बसाया।

4 यदि कोई जन यहोवा के भरोसे रहता है, तो वह मनुष्य सचमुच प्रसन्न होगा।

5 हमारे परमेश्वर यहोवा, तूने बहुतेरे अद्भुत कर्म किये हैं।

6 हे यहोवा, तूने मुझको यह समझाया है:

7 सो मैंने कहा, “देख मैं आ रहा हूँ!

8 हे मेरे परमेश्वर, मैं वही करना चाहता हूँ जो तू चाहता है।

9 महासभा के मध्य मैं तेरी धार्मिकता का सुसन्देश सुनाऊँगा।

10 यहोवा, मैं तेरे भले कर्मो को बखानूँगा।

11 इसलिए हे यहोवा, तूअपनी दया मुझसे मत छिपा!

12 मुझको दुष्ट लोगों ने घेर लिया,

13 हे यहोवा, मेरी ओर दौड़ और मेरी रक्षा कर!

14 वे दुष्ट मनुष्य मुझे मारने का जतन करते हैं।

15 वे दुष्ट जन मेरी हँसी उड़ाते हैं।

16 किन्तु वे मनुष्य जो तुझे खोजते हैं, आनन्दित हो।

17 हे मेरे स्वामी, मैं तो बस दीन, असहाय व्यक्ति हूँ।

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