1 मैंने कहा, “जब तक ये दुष्ट मेरे सामने रहेंगे,
2 सो इसलिए मैंने कुछ नहीं कहा।
3 मैं बहुत क्रोधित था।
4 हे यहोवा, मुझको बता कि मेरे साथ क्या कुछ घटित होने वाला है
5 हे यहोवा, तूने मुझको बस एक क्षणिक जीवन दिया।
6 वह जीवन जिसको हम लोग जीते हैं, वह झूठी छाया भर होता है।
7 सो, मेरे यहोवा, मैं क्या आशा रखूँ
8 हे यहोवा, जो कुकर्म मैंने किये हैं, उनसे तू ही मुझको बचाएगा।
9 मैं अपना मुँह नहीं खोलूँगा।
10 किन्तुपरमेश्वर, मुझको दण्ड देना छोड़ दे।
11 हे यहोवा, तू लोगों को उनके कुकर्मो का दण्ड देता है। और इस प्रकार जीवन की खरी राह लोगों को सिखाता है।
12 हे यहोवा, मेरी विनती सुन!
13 हे यहोवा, मुझको अकेला छोड़ दे,