Salmos 38

HIN2010

1 हे यहोवा, क्रोध में मेरी आलोचना मत कर।

2 हे यहोवा, तूने मुझे चोट दिया है।

3 तूने मुझे दण्डित किया और मेरी सम्पूर्ण काया दु:ख रही है,

4 मैं बुरे काम करने का अपराधी हूँ,

5 मैं बना रहा मूर्ख,

6 मैं झुका और दबा हुआ हूँ।

7 मुझको ज्वर चढ़ा है,

8 मैं पूरी तरह से दुर्बल हो गया हूँ।

9 हे यहोवा, तूने मेरा कराहना सुन लिया।

10 मुझको ताप चढ़ा है।

11 क्योंकि मैं रोगी हूँ,

12 मेरे शत्रु मेरी निन्दा करते हैं।

13 किन्तु मैं बहरा बना कुछ नहीं सुनता हूँ।

14 मैं उस व्यक्ति सा बना हूँ, जो कुछ नहीं सुन सकता कि लोग उसके विषय क्या कह रहे हैं।

15 सो, हे यहोवा, मुझे तू ही बचा सकता है।

16 यदि मैं कुछ भी न कहूँ, तो मेरे शत्रु मुझ पर हँसेंगे।

17 जानता हूँकि मैं अपने कुकर्मो के लिए पापी हूँ।

18 हे यहोवा, मैंने तुझको अपने कुकर्म बता दिये।

19 मेरे शत्रु जीवित और पूर्ण स्वस्थ हैं।

20 मेरे शत्रु मेरे साथ बुरा व्यवहार करते हैं,

21 हे यहोवा, मुझको मत बिसरा!

22 देर मत कर, आ और मेरी सुधि ले!

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