Salmos 31

HIN2010

1 हे यहोवा, मैं तेरे भरोसे हूँ,

2 हे यहोवा, मेरी सुन,

3 हे परमेश्वर, तू मेरी चट्टान है,

4 मेरे लिए मेरे शत्रुओं ने जाल फैलाया है।

5 हे परमेश्वर यहोवा, मैं तो तुझ पर भरोसा कर सकता हूँ।

6 जो मिथ्या देवों को पूजते रहते हैं, उन लोगों से मुझे घृणा है।

7 हे यहोवा, तेरी करुणा मुझको अति आनन्दित करती है।

8 तू मेरे शत्रुओं को मुझ पर भारी पड़ने नहीं देगा।

9 हे यहोवा, मुझ पर अनेक संकट हैं। सो मुझ पर कृपा कर।

10 मेरा जीवन का अंत दु:ख में हो रहा है।

11 मेरे शत्रु मुझसे घृणा रखते हैं।

12 मुझको लोग पूरी तरह से भूल चुके हैं।

13 मैं उन भयंकर बातों को सुनता हूँ जो लोग मेरे विषय में करते हैं।

14 हे यहोवा, मेरा भरोसा तुझ पर है।

15 मेरा जीवन तेरे हाथों में है। मेरे शत्रुओं से मुझको बचा ले।

16 कृपा करके अपने दास को अपना ले।

17 हे यहोवा, मैंने तेरी विनती की।

18 दुर्जन डींग हाँकते हैं

19 हे परमेश्वर, तूने अपने भक्तों के लिए बहुत सी अदूभुत वस्तुएँ छिपा कर रखी हैं।

20 दुर्जन सज्जनों को हानि पहुँचाने के लिए जुट जाते हैं।

21 यहोवा कि स्तुति करो! जब नगर को शत्रुओं ने घेर रखा था,

22 मैं भयभीत था, और मैंने कहा था, “मैं तो ऐसे स्थान पर हूँ जहाँ मुझे परमेश्वर नहीं देख सकता है।”

23 के भक्तों, तुम को यहोवा से प्रेम करना चाहिए!

24 अरे ओ मनुष्यों जो यहोवा की सहायता की प्रतीक्षा करते हो, सुदृढ़ और साहसी बनो!

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