Salmos 30

HIN2010

1 हे यहोवा, तूने मेरी विपत्तियों से मेरा उद्धार किया है।

2 हे मेरे परमेश्वर यहोवा, मैंने तुझसे प्रार्थना की।

3 कब्र से तूने मेरा उद्धार किया, और मुझे जीने दिया।

4 परमेश्वर के भक्तों, यहोवा की स्तुति करो!

5 यहोवा क्रोधित हुआ, सो निर्णय हुआ “मृत्यु।”

6 मैं अब यह कह सकता हूँ, और मैं जानता हूँ

7 हे यहोवा, तू मुझ पर दयालु हुआ

8 हे परमेश्वर, मैं तेरी ओर लौटा और विनती की।

9 मैंने कहा, “परमेश्वर क्या यह अच्छा है कि मैं मर जाऊँ

10 हे यहोवा, मेरी प्रार्थना सुन और मुझ पर करुणा कर!

11 मैंने प्रार्थना की और तूने सहायता की! तूने मेरे रोने को नृत्य में बदल दिया।

12 हे यहोवा, मैं तेरा सदा यशगान करुँगा। मैं ऐसा करुँगा जिससे कभी नीरवता न व्यापे।

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