1 यहोवा का धन्यवाद करो, क्योंकि वह उत्तम है।
2 हर कोई ऐसा व्यक्ति जिसे यहोवा ने बचाया है, इन राष्ट्रों को कहे।
3 यहोवा ने निज भक्तों को बहुत से अलग अलग देशों से इकट्ठा किया है।
4 कुछ लोग निर्जन मरूभूमि में भटकते रहे।
5 वे लोग भूखे थे और प्यासे थे
6 ऐसे उस संकट में सहारा पाने को उन्होंने यहोवा को पुकारा।
7 परमेश्वर उन्हें सीधा उन नगरों में ले गया जहाँ वे बसेंगे।
8 परमेश्वर का धन्यवाद करो उसके प्रेम के लिये
9 प्यासी आत्मा को परमेश्वर सन्तुष्ट करता है।
10 परमेश्वर के कुछ भक्त बन्दी बने ऐसे बन्दीगृह में, वे तालों में बंद थे, जिसमें घना अंधकार था।
11 क्यों क्योंकि उन लोगों ने उन बातों के विरूद्ध लड़ाईयाँ की थी जो परमेश्वर ने कहीं थी,
12 परमेश्वर ने उनके कर्मो के लिये जो उन्होंने किये थे उन लोगों के जीवन को कठिन बनाया।
13 वे व्यक्ति संकट में थे, इसलिए सहारा पाने को यहोवा को पुकारा।
14 परमेश्वर ने उनको उनके अंधेरे कारागारों से उबार लिया।
15 यहोवा का धन्यवाद करो।
16 परमेश्वर हमारे शत्रुओं को हराने में हमें सहायता देता है। उनके काँसें के द्वारों को परमेश्वर तोड़ गिरा सकता है।
17 कुछ लोग अपने अपराधों
18 उन लोगों ने खाना छोड़ दिया
19 वे संकट में थे सो उन्होंने सहायता पाने को यहोवा को पुकारा।
20 परमेश्वर ने आदेश दिया और लोगों को चँगा किया।
21 उसके प्रेम के लिये यहोवा का धन्यवाद करो उसके वे अद्भुत कामों के लिये उसका धन्यवाद करो
22 यहोवा को धन्यवाद देने बलि अर्पित करो, सभी कार्मो को जो उसने किये हैं।
23 कुछ लोग अपने काम करने को अपनी नावों से समुद्र पार कर गये।
24 उन लोगों ने ऐसी बातों को देखा है जिनको यहोवा कर सकता है।
25 परमेश्वर ने आदेश दिया, फिर एक तीव्र पवन तभी चलने लगी।
26 लहरे इतनी ऊपर उठीं जितना आकाश हो
27 लोग लड़खड़ा रहे थे, गिरे जा रहे थे जैसे नशे में धुत हो।
28 वे संकट में थे सो उन्होंने सहायता पाने को यहोवा को पुकारा।
29 परमेश्वर ने तूफान को रोका
30 खिवैया प्रसन्न थे कि सागर शांत हुआ था।
31 यहोवा का धन्यवाद करो उसके प्रेम के लिये धन्यवाद करो
32 महासभा के बीच उसका गुणगान करो।
33 परमेश्वर ने नदियाँ मरूभूमि में बदल दीं।
34 परमेश्वर ने उपजाऊँ भूमि को व्यर्थ की रेही भूमि में बदल दिया।
35 और परमेश्वर ने मरूभूमि को झीलों की धरती में बदला।
36 परमेश्वर भूखे जनों को उस अच्छी धरती पर ले गया
37 फिर उन लोगों ने अपने खेतों में बीजों को रोप दिया।
38 परमेश्वर ने उन लोगों को आशिर्वाद दिया। उनके परिवार फलने फूलने लगे।
39 उनके परिवार विनाश और संकट के कारण छोटे थे
40 परमेश्वर ने उनके प्रमुखों को कुचला और अपमानित किया था।
41 किन्तु परमेश्वर ने तभी उन दीन लोगों को उनकी याचना से बचा कर निकाल लिया।
42 भले लोग इसको देखते हैं और आनन्दित होते हैं,
43 यदि कोई व्यक्ति विवेकी है तो वह इन बातों को याद रखेगा।