Salmos 106

HIN2010

1 यहोवा की प्रशंसा करो!

2 सचमुच यहोवा कितना महान है, इसका बखान कोई व्यक्ति कर नहीं सकता।

3 जो लोग परमेश्वर का आदेश पालते हैं, वे प्रसन्न रहते हैं।

4 यहोवा, जब तू निज भक्तों पर कृपा करे।

5 यहोवा, मुझको भी उन भली बातों में हिस्सा बँटाने दे

6 हमने वैसे ही पाप किये हैं जैसे हमारे पूर्वजों ने किये।

7 हे यहोवा, मिस्र में हमारे पूर्वजों ने

8 किन्तु परमेश्वर ने निज नाम के हेतु हमारे पूर्वजों को बचाया था।

9 परमेश्वर ने आदेश दिया और लाल सागर सूखा।

10 परमेश्वर ने हमारे पूर्वजों को उनके शत्रुओं से बचाया!

11 और फिर उनके शत्रुओं को उसी सागर के बीच ढ़ाँप कर डुबा दिया।

12 फिर हमारे पूर्वजों ने परमेश्वर पर विश्वास किया।

13 किन्तु हमारे पूर्वज उन बातों को शीघ्र भूले जो परमेश्वर ने की थी।

14 हमारे पूर्वजों को जंगल में भूख लगी थी।

15 किन्तु हमारे पूर्वजों ने जो कुछ भी माँगा परमेश्वर ने उनको दिया।

16 लोग मूसा से डाह रखने लगे

17 सो परमेश्वर ने उन ईर्ष्यालु लोगों को दण्ड दिया।

18 फिर आग ने उन लोगों की भीड़ को भस्म किया।

19 उन लोगों ने होरब के पहाड़ पर सोने का एक बछड़ा बनाया

20 उन लोगों ने अपने महिमावान परमेश्वर को

21 हमारे पूर्वज परमेश्वर को भूले जिसने उन्हें बचाया था।

22 परमेश्वर ने हाम के देश में आश्चर्य कर्म किये थे।

23 परमेश्वर उन लोगों को नष्ट करना चाहता था,

24 फिर उन लोगों ने उस अद्भुत देश कनान में जाने से मना कर दिया।

25 अपने तम्बुओं में वे शिकायत करते रहे!

26 सो परमेश्वर ने शपथ खाई कि वे मरूभुमि में मर जायेंगे।

27 परमेश्वर ने कसम खाई कि उनकी सन्तानों को अन्य लोगों को हराने देगा।

28 फिर परमेश्वर के लोग बालपोर में बाल के पूजने में सम्मिलित हो गये।

29 परमेश्वर अपने जनों पर अति कुपित हुआ। और परमेश्वर ने उनको अति दुर्बल कर दिया।

30 किन्तु पीनहास ने विनती की

31 किन्तु परमेश्वर जानता था कि पीनहास ने अति उत्तम कर्म किया है।

32 मरीब में लोग भड़क उठे

33 उन लोगों ने मूसा को अति व्याकुल किया।

34 यहोवा ने लोगों से कहा कि कनान में रह रहे अन्य लोगों को वे नष्ट करें।

35 इस्राएल के लोग अन्य लोगों से हिल मिल गये,

36 वे अन्य लोग परमेश्वर के जनों के लिये फँदा बन गये।

37 यहाँ तक कि परमेश्वर के जन अपने ही बालकों की हत्या करने लगे।

38 परमेश्वर के लोगों ने अबोध भोले जनों की हत्या की।

39 इस तरह परमेश्वर के जन उन पापों से अशुद्ध हुए जो अन्य लोगों के थे।

40 परमेश्वर अपने उन लोगों पर कुपित हुआ।

41 फिर परमेश्वर ने अपने उन लोगों को अन्य जातियों को दे दिया।

42 परमेश्वर के जनों के शत्रुओं ने उन पर अधिकार किया

43 परमेश्वर ने निज भक्तों को बहुत बार बचाया, किन्तु उन्होंने परमेश्वर से मुख मोड़ लिया।

44 किन्तु जब कभी परमेश्वर के जनों पर विपद पड़ी उन्होंने सदा ही सहायाता पाने को परमेश्वर को पुकारा।

45 परमेश्वर ने सदा अपनी वाचा को याद रखा।

46 परमेश्वर के भक्तों को उन अन्य लोगों ने बंदी बना लिया,

47 यहोवा हमारे परमेश्वर, ने हमारी रक्षा की।

48 इस्राएल के परमेश्वर यहोवा को धन्य कहो।

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