Salmos 102

HIN2010

1 यहोवा मेरी प्रार्थना सुन!

2 यहोवा जब मैं विपत्ति में होऊँ मुझ से मुख मत मोड़।

3 मेरा जीवन वैसे बीत रहा जैसा उड़ जाता धुँआ।

4 मेरी शक्ति क्षीण हो चुकी है।

5 निज दु:ख के कारण मेरा भार घट रहा है।

6 मैं अकेला हूँ जैसे कोई एकान्त निर्जन में उल्लू रहता हो।

7 मैं सो नहीं पाता

8 मेरे शत्रु सदा मेरा अपमान करते है,

9 मेरा गहरा दु:ख बस मेरा भोजन है।

10 क्यों क्योंकि यहोवा तू मुझसे रूठ गया है।

11 मेरे जीवन का लगभग अंत हो चुका है। वैसे ही जैसे शाम को लम्बी छायाएँ खो जाती है।

12 किन्तु हे यहोवा, तू तो सदा ही अमर रहेगा।

13 तेरा उत्थान होगा और तू सिय्योन को चैन देगा।

14 तेरे भक्त, उसके (यरूशलेम के) पत्यरों से प्रेम करते हैं।

15 लोग यहोवा के नाम कि आराधना करेंगे।

16 क्यों क्योंकि यहोवा फिर से सिय्योन को बनायेगा।

17 जिन लोगों को उसने जीवित छोड़ा है, परमेश्वर उनकी प्रारथनाएँ सुनेगा।

18 उन बातों को लिखो ताकि भविष्य के पीढ़ी पढ़े।

19 यहोवा अपने ऊँचे पवित्र स्थान से नीचे झाँकेगा।

20 वह बंदी की प्रार्थनाएँ सुनेगा।

21 फिर सिय्योन में लोग यहोवा का बखान करेंगे।

22 ऐसा तब होगा जब यहोवा लोगों को फिर एकत्र करेगा,

23 मेरी शक्ति ने मुझको बिसार दिया है।

24 इसलिए मैंने कहा, “मेरे प्राण छोटी उम्र में मत हरा।

25 बहुत समय पहले तूने संसार रचा!

26 यह जगत और आकाश नष्ट हो जायेंगे,

27 हे परमेश्वर, किन्तु तू कभी नहीं बदलता:

28 आज हम तेरे दास है,

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