1 देखें यहोवा ने सिय्योन की पुत्री को,
2 यहोवा ने याकूब के भवन निगल लिये।
3 यहोवा ने क्रोध में भर कर के इस्राएल की सारी शक्ति उखाड़ फेंकी।
4 यहोवा ने शत्रु के समान अपना धनुष खेंचा था।
5 यहोवा शत्रु हो गया था
6 यहोवा ने अपना ही मन्दिर नष्ट किया था
7 यहोवा ने अपनी ही वेदी को नकार दिया
8 उसने सिय्योन की पुत्री का परकोटा नष्ट करना सोचा है।
9 यरूशलेम के दरवाजे टूट कर धरती पर बैठ गये।
10 सिय्योन के बुजुर्ग अब धरती पर बैठते हैं।
11 मेरे नयन आँसुओं से दु:ख रहे हैं!
12 वे बच्चे बिलखते हुए अपनी माँओं से पूछते हैं, “कहाँ है माँ, कुछ खाने को और पीने को”
13 हे सिय्योन की पुत्री, मैं किससे तेरी तुलना करूँ?
14 तेरे नबियों ने तेरे लिये दिव्य दर्शन लिये थे।
15 बटोही राह से गुजरते हुए स्तब्ध होकर
16 तेरे सभी शत्रु तुझ पर अपना मुँह खोलते हैं।
17 यहोवा ने वैसा ही किया जैसी उसकी योजना थी।
18 हे यरूशलेम की पुत्री परकोटे, तू अपने मन से यहोवा की टेर लगा!
19 जाग उठ! रात में विलाप कर!
20 हे यहोवा, मुझ पर दृष्टि कर!
21 नवयुवक और वृद्ध,
22 तूने मुझ पर घिर आने को चारों ओर से आतंक बुलाया।