1 एक समय वह था जब यरूशलेम में लोगों की भीड़ थी।
2 रात में वह बुरी तरह रोती है
3 बहुत कष्ट सहने के बाद यहूदा बंधुआ बन गयी।
4 सिय्योन की राहें बहुत दु:ख से भरी हैं।
5 यरूशलेम के शत्रु विजयी हैं।
6 सिय्योन की पुत्री की सुंदरता जाती रही है।
7 यरूशलेम बीती बात सोचा करती है,
8 यरूशलेम ने गहन पाप किये थे।
9 यरूशलेम के वस्त्र गंदे थे।
10 शत्रु ने हाथ बढ़ाया और उसकी सब उत्तर वस्तु लूट लीं।
11 यरूशलेम के सभी लोग कराह रहे हैं, उसके सभी लोग खाने की खोज में है।
12 मार्ग से होते हुए जब तुम सभी लोग मेरे पास से गुजरते हो तो ऐसा लगता है जैसे ध्यान नहीं देते हो।
13 यहोवा ने ऊपर से आग को भेज दिया और वह आग मेरी हड्डियों के भीतर उतरी।
14 “मेरे पाप मुझ पर जुए के समान कसे गये।
15 “यहोवा ने मेरे सभी वीर योद्धा नकार दिये।
16 “इन सभी बातों को लेकर मैं चिल्लाई।
17 सिय्योन अपने हाथ फैलाये हैं।
18 यरूशलेम कहा करती है,
19 मैंने अपने प्रेमियों को पुकारा।
20 “हे यहोवा, मुझे देख! मैं दु:ख में पड़ी हूँ!
21 “मेरी सुन, क्योंकि मैं कराह रही हूँ!
22 “मेरे शत्रुओं का बंदी तू अपने सामने आने दे।