1 “अय्यूब, यदि तू चाहे तो पुकार कर देख ले किन्तु तुझे कोई भी उत्तर नहीं देगा।
2 मूर्ख का क्रोध उसी को नष्ट कर देगा।
3 मैंने एक मूर्ख को देखा जो सोचता था कि वह सुरक्षित है।
4 ऐसे मूर्ख व्यक्ति की सन्तानों की कोई भी सहायता न कर सका।
5 उसकी फसल को भूखे लोग खा गये, यहाँ तक कि वे भूखे लोग काँटों की झाड़ियों के बीच उगे अन्न कण को भी उठा ले गये।
6 बुरा समय मिट्टी से नहीं निकलता है,
7 मनुष्य का जन्म दु:ख भोगने के लिये हुआ है।
8 किन्तु अय्यूब, यदि तुम्हारी जगह मैं होता
9 लोग उन अद्भुत भरी बातों को जिन्हें परमेश्वर करता है, नहीं समझते हैं।
10 परमेश्वर धरती पर वर्षा को भेजता है,
11 परमेश्वर विनम्र लोगों को ऊपर उठाता है,
12 परमेश्वर चालाक व दुष्ट लोगों के कुचक्र को रोक देता है।
13 परमेश्वर चतुर को उसी की चतुराई भरी योजना में पकड़ता है।
14 वे चालाक लोग दिन के प्रकाश में भी ठोकरें खाते फिरते हैं।
15 परमेश्वर दीन व्यक्ति को मृत्यु से बचाता है
16 इसलिए दीन व्यक्ति को भरोसा है।
17 “वह मनुष्य भाग्यवान है, जिसका परमेश्वर सुधार करता है
18 परमेश्वर उन घावों पर पट्टी बान्धता है जिन्हें उसने दिया है।
19 वह तुझे छ: विपत्तियों से बचायेगा।
20 अकाल के समय परमेश्वर
21 जब लोग अपने कठोर शब्दों से तेरे लिये बुरी बात बोलेंगे,
22 विनाश और भुखमरी पर तू हँसेगा
23 तेरी वाचा परमेश्वर के साथ है यहाँ तक कि मैदानों की चट्टाने भी तेरा वाचा में भाग लेती है।
24 तू शान्ति से रहेगा
25 तेरी बहुत सन्तानें होंगी और वे इतनी होंगी
26 तू उस पके गेहूँ जैसा होगा जो कटनी के समय तक पकता रहता है।
27 “अय्यूब, हमने ये बातें पढ़ी हैं और हम जानते हैं कि ये सच्ची है।