1 फिर तेमान के एलीपज ने उत्तर दिया:
2 “यदि कोई व्यक्ति तुझसे कुछ कहना चाहे तो
3 हे अय्यूब, तूने बहुत से लोगों को शिक्षा दी
4 जो लोग लड़खड़ा रहे थे तेरे शब्दों ने उन्हें ढाढ़स बंधाया था।
5 किन्तु अब तुझ पर विपत्ति का पहाड़ टूट पड़ा है
6 तू परमेश्वर की उपासना करता है,
7 अय्यूब, इस बात को ध्यान में रख कि कोई भी सज्जन कभी नहीं नष्ट किये गये।
8 मैंने ऐसे लोगों को देखा है जो कष्टों को बढ़ाते हैं और जो जीवन को कठिन करते हैं।
9 परमेश्वर का दण्ड उन लोगों को मार डालता है
10 दुर्जन सिंह की तरह गुरर्ते और दहाड़ते हैं,
11 बुरे लोग उन सिंहों के समान होते हैं जिन के पास शिकार के लिये कुछ भी नहीं होता।
12 “मेरे पास एक सन्देश चुपचाप पहुँचाया गया,
13 जिस तरह रात का बुरा स्वप्न नींद उड़ा देता हैं,
14 मैं भयभीत हुआ और काँपने लगा।
15 मेरे सामने से एक आत्मा जैसी गुजरी
16 वह आत्मा चुपचाप ठहर गया
17 “मनुष्य परमेश्वर से अधिक उचित नहीं हो सकता।
18 परमेश्वर अपने स्वर्गीय सेवकों तक पर भरोसा नहीं कर सकता।
19 सो मनुष्य तो और भी अधिक गया गुजरा है।
20 लोग भोर से सांझ के बीच में मर जाते हैं किन्तु उन पर ध्यान तक कोई नहीं देता है।
21 उनके तम्बूओं की रस्सियाँ उखाड़ दी जाती हैं,