Jó 27

HIN2010

1 फिर अय्यूब ने आगे कहा:

2 “सचमुच परमेश्वर जीता है और यह जितना सत्य है कि परमेश्वर जीता है

3 किन्तु जब तक मुझ में प्राण है

4 तब तक मेरे होंठ बुरी बातें नहीं बोलेंगे,

5 मैं कभी नहीं मानूँगा कि तुम लोग सही हो!

6 मैं अपनी धार्मिकता को दृढ़ता से थामें रहूँगा।

7 मेरे शत्रुओं को दुष्ट जैसा बनने दे,

8 ऐसे उस व्यक्ति के लिये मरते समय कोई आशा नहीं है जो परमेश्वर की परवाह नहीं करता है।

9 जब वह बुरा व्यक्ति दु:खी पड़ेगा और उसको पुकारेगा,

10 उसको चाहिये था कि वह उस आनन्द को चाहे जिसे केवल सर्वशक्तिमान परमेश्वर देता है।

11 “मैं तुमको परमेश्वर की शक्ति सिखाऊँगा।

12 स्वयं तूने निज आँखों से परमेश्वर की शक्ति देखी है,

13 “दुष्ट लोगों के लिये परमेश्वर ने ऐसी योजना बनाई है,

14 दुष्ट की चाहे कितनी ही संताने हों, किन्तु उसकी संताने युद्ध में मारी जायेंगी।

15 और यदि दुष्ट की संताने उसकी मृत्यु के बाद भी जीवित रहें तो महामारी उनको मार डालेंगी!

16 दुष्ट जन चाहे चाँदी के ढेर इकट्ठा करे,

17 जिन वस्त्रों को दुष्ट जन जुटाता रहा उन वस्त्रों को सज्जन पहनेगा,

18 दुष्ट का बनाया हुआ घर अधिक दिनों नहीं टिकता है,

19 दुष्ट जन अपनी निज दौलत के साथ अपने बिस्तर पर सोने जाता है,

20 दु:ख अचानक आई हुई बाढ़ सा उसको झपट लेंगे,

21 पुरवाई पवन उसको दूर उड़ा देगी,

22 दुष्ट जन तूफान की शक्ति से बाहर निकलने का जतन करेगा

23 जब दुष्ट जन भागेगा, लोग उस पर तालियाँ बजायेंगे, दुष्ट जन जब निकल भागेगा।

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