1 तब अय्यूब ने कहा:
2 “हे बिल्दद, सोपर और एलीपज जो लोग दुर्बल हैं तुम सचमुच उनको सहारा दे सकते हो।
3 हाँ, तुमने निर्बुद्धि को अद्भुत सम्मत्ति दी है।
4 इन बातों को कहने में किसने तुम्हारी सहायता की
5 “जो लोग मर गये है
6 मृत्यु का स्थान परमेश्वर की आँखों के सामने खुला है,
7 उत्तर के नभ को परमेश्वर फैलाता है।
8 परमेश्वर बादलों को जल से भरता है,
9 परमेश्वर पूरे चन्द्रमा को ढकता है,
10 परमेश्वर क्षितिज को रचता है
11 जब परमेश्वर डाँटता है तो
12 परमेश्वर की शक्ति सागर को शांत कर देती है।
13 परमेश्वर का श्वास नभ को साफ कर देता है।
14 ये तो परमेश्वर के आश्चर्यकर्मों की थोड़ी सी बातें हैं।