1 मेरी संगिनी, हे मेरी दुल्हिन, मैंने अपने उपवन में
2 मैं सोती हूँ
3 “मैंने निज वस्त्र उतार दिया है।
4 मेरे प्रियतम ने कपाट की झिरी में हाथ डाल दिया,
5 मैं अपने प्रियतम के लिये द्वार खोलने को उठ जाती हूँ।
6 अपने प्रियतम के लिये मैंने द्वार खोल दिया,
7 नगर के पहरुओं ने मुझे पाया।
8 यरूशलेम की पुत्रियों, मेरी तुमसे विनती है
9 क्या तेरा प्रिय, औरों के प्रियों से उत्तम है स्त्रियों में तू सुन्दरतम स्त्री है।
10 मेरा प्रियतम गौरवर्ण और तेजस्वी है।
11 उसका माथा शुद्ध सोने सा,
12 ऐसी उसकी आँखे है जैसे जल धार के किनारे कबूतर बैठे हों।
13 गाल उसके मसालों की क्यारी जैसे लगते हैं,
14 उसकी भुजायें सोने की छड़ जैसी है
15 उसकी जाँघे संगमरमर के खम्बों जैसी है
16 हाँ, यरूशलेम की पुत्रियों, मेरा प्रियतम बहुत ही अधिक कामनीय है,