1 स्त्रियों में सुन्दरतम स्त्री,
2 मेरा प्रिय अपने उपवन में चला गया,
3 मैं हूँ अपने प्रियतम की
4 मेरी प्रिय, तू तिर्सा सी सुन्दर है,
5 मेरे ऊपर से तू आँखें हटा ले!
6 तेरे दाँत ऐसे सफेद है
7 घूँघट के नीचे तेरी कनपटियाँ
8 वहाँ साठ रानियाँ,
9 किन्तु मेरी कबूतरी, मेरी निर्मल,
10 वह कुमारियाँ कौन है
11 मैं गिरीदार पेड़ों के बगीचे में घाटी की बहार को
12 इससे पहले कि मैं यह जान पाती, मेरे मन ने मुझको राजा के व्यक्तियों के रथ में पहुँचा दिया।
13 वापस आ, वापस आ, ओ शुलेम्मिन!