1 दुष्ट म्हिमैं म्रोंसि ह्रिस आलद्,
2 तलेबिस्याँ चमैंइ आगुए न्होह्रों लबै ताँमैं मैंरिम्,
3 बुद्धिइ धिं बनेम्,
4 ज्ञान मुँबै म्हिए धिंर
5 बुद्धि मुँबै म्हि भोंब तम्,
6 च्हैंब् मैंब् नेरो सल्ला मदो लसि क्हिइ ल्हडें नेल् खाँम्,
7 आमादुए ल्हागिर बुद्धि स्यालै आखाँल्ले नुल्ले मुँ;
8 आछ्याँबै केमैं लबर चाँजोमैं लबै म्हिलाइ
9 बुद्धि आरेबै म्हिइ लबै चाजोमैं पाप ग,
10 दुःख तमा रालै आखाँन् तइ बिस्याँ
11 सैबर बोब्मैंलाइ जोगेद्;
12 क्हिइ “चए बारेर ङिइ तोइ था आयों!” बिलेया
13 ओ ङए च्ह, क्वे खुदु चब्रें लद्, तलेबिस्याँ क्हिए ज्युए ल्हागिर क्वे खुदु छ्याँबै सै ग;
14 छलेन बुद्धि क्हिए सोए ल्हागिर खुदु धोंन् ग;
15 ठिक के लबै म्हिए धिंर न्होह्रों लबर लोइ टिबै दुष्ट म्हि धों आतद्;
16 तलेबिस्याँ ठिक के लबै म्हि ङिखे समा क्हुरियालेया धबै रेम्,
17 क्हिए शत्तुरमैंए न्होहों तमा क्हि सैं आतोंन्,
18 छाबै म्हिमैं याहवेहजी आखो,
19 दुष्ट म्हिमैंइ लमा न्हुँ आलद्,
20 तलेबिस्याँ दुष्ट म्हिमैंए छ्हर आशिक आख;
21 ओ ङए च्ह, याहवेहए मान् लद्, धै म्रुँ बिब् ङिंन्,
22 तलेबिस्याँ थाइ आसेल्ले चमैं नास तयाब्मुँ।
23 म्हि ङ्ह्यासि निसाफ लल् आत।
24 दुष्ट के लबै म्हिलाइ “क्हि ठिकन् मुँ,” बिबै म्हिलाइ
25 दिलेया दुष्ट म्हिमैंए दोष उँइँबै म्हिमैंल मैंब् धों बिब् धों तब्मुँ,
26 स्योर आतेल्ले जवाफ पिंब
27 बैरुबै केमैं ताँन् म्हेलिदिद्;
28 ह्रोंसए ङ्हेब्-ट्हुब्मैंए बिरोधर तोनतोर्न ग्वाइ आटिद्,
29 “चइ ङए न्होह्रों लइ, छतसि ङज्यै या चए न्होह्रों लवाम्;
30 ङ प्ल्हेगु म्हिए म्रोंए घ्याँ ततै ह्यामा
31 चर खन्तोदोंन् पुजुमैं मुँल,
32 छाब् म्रोंसि ङए सैंर ताँ घ्रि खइ,
33 “ङ तिस्याँदे रोम्, तिस्याँदे प्लिंम्,
34 क्हिए फिर ह्योमैं धोंले ङ्हाँदु,