1 हे सासन करइयामन, का तुमन सही म नियाय-संगत बात करथव?
2 नइं, अपन मन म तुमन अनियाय करे के उपाय करथव,
3 अऊ त अऊ दुस्टमन जनम ले गलत रसता म चलथें;
4 ओमन के जहर ह एक सांप के जहर सहीं अय,
5 अऊ ओह संपेरा के धुन ऊपर धियान नइं देवय,
6 हे परमेसर, ओमन के मुहूं म ही ओमन के दांत ला टोर दे;
7 ओमन ओ पानी के सहीं गायब हो जावंय, जऊन ह बहत-बहत आघू निकल जाथे;
8 ओमन एक घोंघा के सहीं हो जावंय, जऊन ह सरकत-सरकत टघल जाथे,
9 येकर पहिले कि कंटिला-झाड़ी म लगे आगी के आंच ह तोर हांड़ी म लगय—
10 जब ओमन ले बदला लिये जाही, त धरमीमन खुस होहीं,
11 तब मनखेमन कहिहीं,