1 दुख देवइया, बिदरोही
2 ओह काकरो बात ला नइं मानय,
3 ओकर अधिकारीमन ओकर भीतर
4 ओकर अगमजानीमन सही मनखे नो हंय;
5 यहोवा, जऊन ह ओकर भीतर हवय, ओह धरमी अय;
6 “मेंह जाति-जाति के मनखेमन ला नास करे हंव;
7 यरूसलेम के बारे म मोर ये बिचार रिहिस,
8 एकर कारन मोर बर ओ दिन के इंतजार करव,” यहोवा ह घोसना करत हे,
9 “तब में मनखेमन के ओंठ ला सुध करहूं,
10 कूस के नदीमन के ओ पार ले
11 हे यरूसलेम, ओ दिन, तोला मोर बिरूध करे गय
12 पर मेंह तुम्हर बीच म
13 ओमन कोनो गलत काम नइं करहीं;
14 हे बेटी सियोन, गा;
15 यहोवा ह तोर दंड ला दूरिहा कर दे हवय,
16 ओ दिन
17 यहोवा, तोर परमेसर ह तोर संग हवय,
18 “मेंह ओ सबो झन ला तोर बीच ले हटा दूहूं
19 ओ समय मेंह ओ जम्मो झन ले लेखा लूहूं
20 ओ समय मेंह तुमन ला संकेलहूं;