1 हे मोर बेटा, यदि तेंह अपन परोसी बर जमानत ले हस,
2 तेंह अपन ही बात म फंस गे हस,
3 त हे मोर बेटा, अपनआप ला बंचाय बर अइसे कर,
4 जागत रह;
5 अपनआप ला छुड़ा, जइसे हिरन ह सिकारी के हांथ ले,
6 हे अलाल मनखे, चांटीमन करा जा;
7 ओमन ला न तो कोनो हुकूम देवइया होथे,
8 तभो ले ओमन धूपकाला म अपन खाना संकेलथें
9 हे अलाल मनखे, तेंह कब तक सोवत रहिबे?
10 थोरकन अऊ नींद, थोरकन अऊ ऊंघासी,
11 अऊ गरीबी ह चोर सहीं,
12 समस्या खड़े करइया अऊ दुस्ट मनखे ह
13 ओह खराप इरादा से आंखी मारथे,
14 ये काम ओह अपन खराप मन ले बुरई के बात ला सोचके करथे;
15 एकरसेति, बिपत्ति ह ओकर ऊपर अचानक आ जाही;
16 छै ठन चीज ला यहोवा ह नापसंद करथे,
17 घमंड ले भरे आंखी,
18 दुस्टता के बात सोचनेवाला हिरदय,
19 लबरा गवाह, जऊन ह लबारी के ऊपर लबारी मारथे
20 हे मोर बेटा, अपन ददा के हुकूम ला मान
21 ये बातमन ला हमेसा अपन हिरदय म रख;
22 जब तेंह रेंगबे, त येमन तोर अगुवई करहीं;
23 काबरकि ये हुकूम ह एक दीया सहीं अय;
24 येमन तोला परोसी के घरवाली,
25 ओकर सुघरता ला देखके अपन मन म ओकर लालसा झन कर
26 काबरकि एक बेस्या के कीमत एक रोटी हो सकथे,
27 का अइसे हो सकथे कि कोनो मनखे आगी ला अपन कोरा म रखे
28 या का अइसे हो सकथे कि कोनो मनखे आगी म रेंगे
29 अइसे ओ मनखे के दसा होथे, जऊन ह आने के घरवाली संग सुतथे;
30 जऊन चोर ह अपन पेट के भूख ला मिटाय बर चोरी करथे,
31 तभो ले यदि ओह पकड़े जाथे, त ओला सात गुना भरना पड़ही;
32 जऊन ह बेभिचार करथे, ओकर करा बुद्धि नइं ए;
33 ओह मार खाथे अऊ अपमानित होथे,
34 काबरकि जलन ह घरवाला ला बहुंत गुस्सा देवाथे,
35 ओह नुकसान के भरपई नइं चाहय;