1 जइसने कि गरमी के महिना म बरफ गिरई अऊ फसल लुवई के बेरा बारिस होवई ह बने नो हय
2 जइसने कि डेना फड़फड़ावत गौरइया या उड़त अबाबील चिरई नइं बईठ सकय,
3 घोड़ा बर चाबुक, गदहा बर लगाम,
4 कोनो मुरूख ला ओकर मुरूखता के मुताबिक जबाब झन देबे,
5 मुरूख ला ओकर मुढ़ता के मुताबिक जबाब देबे,
6 कोनो मुरूख के हांथ ले खबर पठोई ह
7 जइसने कि कोनो लंगड़ा के बेकार गोड़ ह होथे
8 जइसने कि कोनो पट्टा म बंधई पथरा होथे
9 जइसने कि कोनो मतवार के हांथ म कंटिली झाड़ी होथे
10 जइसने कि कोनो धनुसधारी ह बिगर सोचे-समझे चोट पहुंचाथे
11 जइसने कि कुकुर ह अपन उछरे चीज ला खाय बर फेर लहुंटके आथे,
12 का तेंह अइसे मनखे ला देखथस, जऊन ह अपन खुद के नजर म बुद्धिमान ए?
13 आलसी मनखे ह कहिथे, “डहार म सेर हवय,
14 जइसने कि कपाट ह अपन कब्जा म घुमथे,
15 आलसी मनखे ह अपन हांथ जेवन के थाली म तो डालथे;
16 आलसी मनखे ह अपनआप ला ओ सात मनखे ले घलो बुद्धिमान समझथे,
17 जइसने कि कोनो मनखे ह भटकत कुकुर ला कान ले धरथे
18 जइसने कि पागल मनखे ह
19 वइसने ही ओह अय, जऊन ह अपन परोसी ला धोखा देथे
20 जइसने कि बिगर लकरी के आगी ह बुता जाथे;
21 जइसने कि कोइला ह आगी ला बनाय रखथे अऊ लकरी ले आगी बरथे
22 बकवास करई ह सुवादवाले जेवन सहीं होथे;
23 जइसने कि चांदी के परत चढ़ाय माटी के बरतन होथे
24 बईरीमन अपन बात के दुवारा सीधवा बनथें,
25 हालाकि ओमन खुसी देवइया बात कहिथें, पर ओमन ऊपर बिसवास झन करबे,
26 ओमन के बईरता ह छल-कपट के कारन छुप जाथे,
27 जऊन ह आने बर खंचवा कोड़थे, ओह खुद ओमा गिरही;
28 जऊन ह लबारी मारके आने मन ला चोट पहुंचाथे, ओह ओमन ले घिन करथे,