1 अंगूर के मंद ह ठट्ठा करवाथे अऊ आने मंद ह झगरा करवाथे;
2 एक राजा के गुस्सा ह सेर के गरजन सहीं भय पईदा करथे;
3 जऊन ह झगरा करे ले बचथे, येह ओकर बर आदर के बात अय,
4 आलसी मनखेमन समय म खेत नइं जोतंय;
5 मनखे के मन के उदेस्य ह गहिरा पानी के सहीं अय,
6 बहुंते जन सही मया करे के दावा करथें,
7 धरमी जन निरदोस जिनगी जीथें;
8 जब राजा ह नियाय करे बर अपन सिंघासन म बईठथे,
9 कोन ह कह सकथे, “मेंह अपन हिरदय ला सुध करे हंव;
10 गलत वजन अऊ गलत नाप—
11 छोटे लइकामन घलो अपन काम के दुवारा जाने जाथें,
12 सुने बर कान अऊ देखे बर आंखी—
13 नींद ले मया झन कर, नइं तो गरीब हो जाबे;
14 बिसात बेरा बिसइया ह कहिथे, “येह बने नो हय, येह बने नो हय!”
15 सोन अऊ बहुंत मंहगी रत्न तो हवंय
16 ओ मनखे के कपड़ा ला लेय ले, जऊन ह कोनो अजनबी के जिम्मेदारी लेथे;
17 बेईमानी करके कमाय जेवन ह मनखे ला मीठ लगथे,
18 सलाह लेय के दुवारा योजना ह सफल होथे;
19 बकवास करे ले भरोसा ह टूटथे;
20 यदि कोनो अपन दाई या ददा ला सराप देथे,
21 जऊन ह अपन उत्तराधिकार ला जल्दबाजी म ले लेथे
22 अइसे झन कह, “मेंह तोर ये बुरई के बदला लूहूं!”
23 यहोवा ह गलत वजन ले घिन करथे,
24 मनखे के पांव ला यहोवा ह रसता देखाथे।
25 जऊन ह बिगर सोचे-बिचारे कोनो चीज ला समरपित करथे
26 बुद्धिमान राजा ह दुस्टमन ला पछरके निकालथे,
27 मनखे के आतमा ह यहोवा के दीया ए
28 मया अऊ सच्चई राजा ला बनाय रखथे;
29 जवानमन के गौरव ओमन के ताकत ए,
30 मुक्का अऊ चोट खाय ले बुरई ह दूर होथे,