1 जऊन गरीब के चालचलन ह सही रहिथे
2 बिगर गियान के ईछा करई ह बने नो हय—
3 मनखे ला ओकर मुरूखता ह बिनास कोति ले जाथे,
4 धनी मनखे के बहुंत संगी बन जाथें,
5 लबरा गवाह ह दंड पाही,
6 नाना किसम के भोजन ले सासन करइया ह खुस होथे,
7 गरीब मनखे ला ओकर जम्मो रिस्तेदार नापसंद करथें,
8 जऊन ह बुद्धि पाथे, ओह जिनगी ले मया करथे;
9 लबरा गवाह ह दंड पाही,
10 मुरूख मनखे ला सुबिधा के जिनगी जीना नइं फबे—
11 मनखे के बुद्धि ले धीरज आथे;
12 राजा के गुस्सा ह सिंह के गरजन सहीं होथे,
13 मुरूख लइका ह अपन ददा के बिनास के कारन होथे,
14 घर अऊ संपत्ति दाई-ददा ले उत्तराधिकार म मिलथे,
15 आलसीपन ले भारी नींद आथे,
16 जऊन ह हुकूम ला मानथे, ओह अपन जिनगी ला बचाथे,
17 जऊन ह गरीब ऊपर दया करथे, ओह यहोवा ला उधार देथे,
18 अपन लइकामन के ताड़ना कर, काबरकि येमा आसा हवय;
19 जऊन ह बहुंत गुस्सावाला ए, ओह जरूर दंड पावय;
20 सलाह ला मान अऊ ताड़ना ला गरहन कर,
21 मनखे ह अपन मन म बहुंत योजना बनाथे,
22 मनखे ह जेकर ईछा करथे, ओह अटूट मया ए;
23 यहोवा के भय मनई ह जिनगी के तरफ ले जाथे;
24 आलसी मनखे ह अपन हांथ जेवन के थाली म तो डालथे;
25 ठट्ठा करइया ला कोर्रा म मार, अऊ सीधा मनखे ह समझदारी के बात सीखही;
26 जऊन ह अपन ददा ला लूटथे अऊ अपन दाई ला निकाल देथे,
27 हे मोर बेटा, यदि तें सिकछा के बात सुने बर बंद कर देबे,
28 भ्रस्ट गवाह ह नियाय ला ठट्ठा म उड़ाथे,
29 ठट्ठा करइयामन ला दंड मिलथे,