1 मोर का दुरगति हवय!
2 बिसवास लईक मनखेमन देस ले नास हो गे हवंय;
3 ओमन के दूनों हांथ दुस्ट काम करे म माहिर हवंय;
4 ओमन म जऊन ह सबले बने माने जाथे, ओह एक कांटावाले झाड़ी के सहीं अय,
5 कोनो परोसी ऊपर बिसवास झन करबे,
6 काबरकि बेटा ह अपन ददा के अनादर करथे,
7 पर जहां तक मोर बात ए, मोर आसा ह यहोवा ऊपर लगे रहिथे,
8 हे मोर बईरी, मोर दसा ऊपर आनंद झन मना!
9 काबरकि मेंह ओकर बिरूध पाप करे हंव,
10 तब मोर बईरी ह येला देखही
11 तुम्हर भीथीमन ला बनाय के दिन,
12 ओ दिन मनखेमन तुम्हर करा
13 धरती के निवासीमन के कारन, ओमन के काम के परिनाम स्वरूप,
14 अपन मनखेमन के रखवारी,
15 “जब तुमन मिसर देस ले निकलके आयेव, ओ दिनमन सहीं,
16 जाति-जाति के मनखेमन येला देखहीं
17 ओमन सांप सहीं,
18 तोर सहीं अऊ कोन परमेसर हवय,
19 तेंह हमर ऊपर फेर दया करबे;
20 जइसे कि बहुंत पहिले हमर पुरखामन ले किरिया खाके,