1 सुनव कि यहोवा ह का कहत हे:
2 “हे पहाड़मन, यहोवा के दुवारा लगाय आरोप ला सुनव;
3 “हे मोर मनखेमन, मेंह तुम्हर संग का अनियाय करे हवंव?
4 मेंह तुमन ला मिसर देस ले बाहिर निकालेंव
5 हे मोर मनखेमन, सुरता करव
6 में यहोवा के आघू म का लेके आवंव
7 का यहोवा ह हजारों मेढ़ा,
8 हे मरनहार मनखे, ओह तोला देखाय हवय कि का ह बने अय।
9 सुनव! यहोवा ह सहर ला बलावत हे—
10 हे दुस्ट घर, का में अब घलो तोर दुस्टता ले कमाय धन,
11 का में कोनो ला बेईमानी के नाप,
12 तोर धनी मनखेमन हिंसा करथें;
13 एकरसेति, मेंह तुम्हर पाप के कारन
14 तुमन जेवन तो करहू पर मन ह नइं भरही;
15 तुमन अनाज के बोवई तो करहू, पर फसल नइं काटहू;
16 तुमन ओमरी राजा के बिधि-बिधान