1 आह, बने होतिस कि मोर मुड़ ह पानी के सोता
2 आह, बने होतिस कि डहार रेंगइयामन बर
3 “ओमन अपन जीभ ला धनुस म चघाय तीर सहीं
4 “अपन संगीमन ले सचेत रहव;
5 संगी ह संगी ला धोखा देथे,
6 तेंह छल-कपट के बीच म रहिथस;
7 एकरसेति सर्वसक्तिमान यहोवा ह ये कहत हे:
8 ओमन के जीभ ह मिरतू के तीर सहीं अय;
9 का मेंह अइसने बात बर ओमन ला सजा नइं दंव?”
10 मेंह पहाड़मन बर रोहूं अऊ बिलाप करहूं
11 “मेंह यरूसलेम ला एक खंडहर,
12 कोन ह अतेक बुद्धिमान ए कि येला समझय? यहोवा ह कोन ला बताय हवय कि ओह येला समझा सकय? देस के काबर बिनास हो गे हवय अऊ मरू-भुइयां सहीं उजाड़ पड़े हवय कि येला कोनो पार नइं कर सकंय?
13 यहोवा ह कहिस, “येह एकर कारन होईस काबरकि ओमन मोर ओ कानून ला तियाग दे हवंय, जऊन ला मेंह ओमन के आघू रखे रहेंव; ओमन न तो मोर बात मानिन अऊ न ही मोर कानून के मुताबिक चलिन।
14 एकर बदला, ओमन अपन मन के जिद्दी सुभाव के मुताबिक चलिन; ओमन बाल देवतामन के पाछू चलिन, जइसने कि ओमन के पुरखामन ओमन ला सिखाय रिहिन।”
15 एकरसेति सर्वसक्तिमान यहोवा, इसरायल के परमेसर ह ये कहत हे: “सुनव, मेंह ये मनखेमन ला करू जेवन खवाहूं अऊ जहरिला पानी पीयाहूं।
16 मेंह ओमन ला अइसने देसमन के बीच म तितिर-बितिर कर दूहूं, जेला न तो ओमन अऊ न ही ओमन के पुरखामन जानत रिहिन, अऊ जब तक मेंह ओमन के अन्त नइं कर दूहूं, तब तक मेंह तलवार लेके ओमन के पाछू पड़े रहिहूं।”
17 सर्वसक्तिमान यहोवा ह ये कहत हे:
18 ओमन जल्दी आवंय
19 सियोन ले बिलाप करे के अवाज सुनई देवत हे:
20 एकरसेति, हे माईलोगनमन, यहोवा के ये बचन ला सुनव;
21 मिरतू ह हमर खिड़कीमन ले होके भीतर आ गे हवय
22 तेंह कह, “यहोवा ह ये घोसना करत हे:
23 यहोवा ह ये कहत हे:
24 पर जऊन ह घमंड करथे, ओह ये बात म घमंड करय:
25 “ओ दिनमन आवत हें,” यहोवा ह घोसना करत हे, “जब मेंह ओ जम्मो झन ला सजा दूहूं, जेमन के खतना सिरिप देहें म होय हवय—
26 याने कि मिसर, यहूदा, एदोम, अमोन, मोआब के मनखे अऊ ओ जम्मो जऊन मन दूरिहा म सुनसान जगह म रहिथें। काबरकि ये जम्मो जातिमन सही म खतनारहित अंय, अऊ त अऊ इसरायल के जम्मो घराना ह घलो मन म खतनारहित अय।”