1 यहोवा कोति ले ये बचन यरमियाह करा आईस:
2 “खाल्हे कुम्हार के घर म जा, अऊ उहां मेंह तोला अपन संदेस दूहूं।”
3 एकरसेति मेंह कुम्हार के घर गेंव, अऊ मेंह ओला चाक म काम करत देखेंव।
4 पर जऊन माटी के बरतन ओह बनावत रिहिस, ओह ओकर हांथ म बिगड़ गीस; त ओला जइसने बने लगिस, वइसने ओह ओ माटी ला आने बरतन के आकार दे दीस।
5 तब यहोवा के ये बचन मोर करा आईस।
6 ओह कहिस, “हे इसरायल के मनखेमन, जइसने ये कुम्हार ह करत हे, का मेंह घलो तुम्हर संग वइसने नइं कर सकत हंव?” यहोवा ह घोसना करत हे। “हे इसरायल, जइसने कुम्हार के हांथ म माटी हवय, वइसने तेंह घलो मोर हांथ म हस।
7 यदि कोनो भी समय, मेंह घोसना करथंव कि कोनो जाति या राज ला उखान दिये जावय, गिरा दिये जावय अऊ नास कर दिये जावय,
8 अऊ यदि ओ देस के मनखेमन पाप ले पछताप करथें, जेला मेंह चेतउनी दे रहेंव, तब मेंह धीरज धरहूं अऊ जऊन बिपत्ति मेंह ओमन ऊपर लाने के ठाने रहेंव, ओला नइं लानहूं,
9 अऊ यदि आने समय म, मेंह घोसना करथंव कि कोनो जाति या राज ला बनाय जावय अऊ जगाय जावय,
10 अऊ यदि ओ जाति मोर नजर म पाप करथे अऊ मोर बात ला नइं मानय, तब मेंह जऊन भलई करे के इरादा ओमन बर करे रहेंव, ओकर बारे म फेर बिचार करहूं।
11 “एकरसेति अब तें यहूदा अऊ यरूसलेम के मनखेमन ला कह, ‘यहोवा ह ये कहत हे: देखव! मेंह तुम्हर बर एक बिपत्ति तियार करत हंव अऊ तुम्हर बिरूध म एक योजना बनात हंव। एकरसेति तुमन ले हर एक जन अपन खराप चालचलन ले फिरव अऊ अपन चालचलन अऊ काममन ला सुधारव।’
12 पर ओमन जबाब दीहीं, ‘अइसने नइं होवय। हमन अपन ही चालचलन म चलते रहिबो; हमन जम्मो अपन पापी हिरदय के जिद म बने रहिबो।’ ”
13 ये खातिर यहोवा ह ये कहत हे:
14 का लबानोन के बरफ ह
15 तभो ले मोर मनखेमन मोला भुला गे हवंय;
16 ओमन के देस ह निरजन हो जाही,
17 पूरब के हवा सहीं,
18 तब मनखेमन एक-दूसर ला कहिन, “आवव, यरमियाह के बिरूध उपाय करन; काबरकि न तो पुरोहित के दुवारा कानून के सिकछा, न ही बुद्धिमान के सलाह, न ही अगमजानीमन ले बचन ह बंद होही। एकरसेति आवव, हमन अपन बात के दुवारा ओकर ऊपर हमला करन अऊ ओकर कोनो बात ऊपर धियान झन देवन।”
19 हे यहोवा, मोर बात ला सुन;
20 का भलई के बदले बुरई करे जावय?
21 एकरसेति ओमन के लइकामन ला अकाल ला देय दे;
22 जब तें ओमन ऊपर अचानक हमला करइयामन ला लानबे,
23 पर हे यहोवा, ओमन मोला मार डारे बर