1 तब सूही के रहइया बिलदद ह जबाब दीस:
2 “तेंह कब ये भासन ला खतम करबे?
3 हमन काबर पसु सहीं समझे जावत हन
4 तें जऊन ह अपन रिस म अपनआप ला कुटा-कुटा करत हस,
5 “दुस्ट मनखे के दीया ह बुता जाथे;
6 दुस्ट मनखे के डेरा म अंजोर ह अंधियार हो जाथे,
7 ओकर गोड़ के बल ह कमजोर हो जाथे;
8 ओकर पांव ह ओला जाल म फंसोथे;
9 फांदा ह ओकर एड़ी ला जकड़ लेथे;
10 भुइयां म ओकर बर एक फांदा छिपे हवय;
11 आतंक ह ओला जम्मो कोति ले चउंकाथे
12 बिपत्ति ह ओकर बर भूखन हवय;
13 येह ओकर चाम के भागमन ला खा जाथे;
14 ओह अपन डेरा के सुरकछा ले चीर डाले जाथे
15 आगी ह ओकर डेरा म रहिथे;
16 ओकर जरी ह खाल्हे ले सूखा जाथे
17 धरती ले ओकर सुरता ह मिट जाथे;
18 ओला अंजोर ले अंधियार के जगह म भगाय जाथे
19 अपन मनखेमन के बीच म, ओकर कोनो संतान नइं रहंय,
20 पछिम के मनखेमन ओकर दुरदसा ला देखके डराथें;
21 खचित, दुस्ट मनखे के निवास ह अइसने ही होथे;