1 मेंह अपन पहरा म ठाढ़े रहिहूं
2 तब यहोवा ह मोला जबाब दीस:
3 काबरकि ये दरसन के बात ह एक ठहिराय समय म पूरा होही;
4 “देख, बईरी के मन ह फुल गे हवय;
5 वास्तव म, अंगूर के मंद ह ओला धोखा देथे;
6 “का ओ जम्मो झन ये कहिके ओकर हंसी नइं उड़ाहीं अऊ बेजत्ती करके ताना नइं मारहीं,
7 का तुमन ला करजा देवइयामन अचानक तुम्हर मेर नइं आ जाहीं?
8 काबरकि तुमन बहुंते जाति के मनखेमन ला लूटे हव,
9 “ओकर ऊपर हाय, जऊन ह अनियाय के कमई ले अपन घर ला बनाथे,
10 अपन ही घर ला लज्जित करके अऊ अपन ही परान ला जोखिम म डालके
11 दीवार के पथरामन चिचियाहीं,
12 “ओकर ऊपर हाय, जऊन ह लहू बोहाके एक सहर ला बनाथे
13 का सर्वसक्तिमान यहोवा ह ये बात ला नइं ठान ले हवय
14 काबरकि धरती ह यहोवा के महिमा के गियान ले अइसन भर जाही
15 “ओकर ऊपर हाय, जऊन ह अपन परोसीमन ला मंद पीयाथे,
16 तेंह महिमा के बदले लाज ले भर जाबे।
17 तेंह जऊन हिंसा के काम लबानोन म करे हस, ओमन तोला बियाकुल करहीं,
18 “एक कारीगर के दुवारा बनाय गे मूरती के का महत्व?
19 ओकर ऊपर हाय, जऊन ह कठवा ले कहिथे, ‘जी उठ!’
20 यहोवा ह अपन पबितर मंदिर म हवय;