1 मात्र परमेश्वर में मेरे प्राणों की विश्रान्ति है;
2 वही मेरे लिए एक स्थिर चट्टान और मेरा उद्धार हैं;
3 तुम कब तक उस पुरुष पर प्रहार करते रहोगे,
4 उन्होंने मुझे मेरी उन्नत जगह से
5 मेरे प्राण, शांत होकर परमेश्वर के उठने की प्रतीक्षा कर;
6 वही मेरे लिए एक स्थिर चट्टान और मेरा उद्धार हैं;
7 मेरा उद्धार और मेरा सम्मान परमेश्वर पर अवलंबित हैं;
8 मेरे लोगो, हर एक परिस्थिति में उन्हीं पर भरोसा रखो;
9 साधारण पुरुष श्वास मात्र हैं,
10 न तो हिंसा-अत्याचार से कुछ उपलब्ध होगा,
11 परमेश्वर ने एक बात प्रकाशित की,
12 तथा प्रभु, आपका प्रेम अमोघ”;