Salmos 42

HINCV

1 जैसे हिरणी को बहते झरनों की उत्कट लालसा होती है,

2 मेरा प्राण परमेश्वर के लिए, हां, जीवन्त परमेश्वर के लिए प्यासा है.

3 दिन और रात,

4 जब मैं अपने प्राण आपके सम्मुख उंडेल रहा हूं,

5 मेरे प्राण, तुम ऐसे खिन्‍न क्यों हो?

6 मेरे परमेश्वर! मेरे अंदर खिन्‍न है मेरा प्राण;

7 आपके झरने की गर्जना के ऊपर से

8 दिन के समय याहवेह अपना करुणा-प्रेम प्रगट करते हैं,

9 परमेश्वर, मेरी चट्टान से मैं प्रश्न करूंगा,

10 जब सारे दिन मेरे दुश्मन

11 मेरे प्राण, तुम ऐसे खिन्‍न क्यों हो?

Ler em outra tradução

Comparar lado a lado