1 जैसे हिरणी को बहते झरनों की उत्कट लालसा होती है,
2 मेरा प्राण परमेश्वर के लिए, हां, जीवन्त परमेश्वर के लिए प्यासा है.
3 दिन और रात,
4 जब मैं अपने प्राण आपके सम्मुख उंडेल रहा हूं,
5 मेरे प्राण, तुम ऐसे खिन्न क्यों हो?
6 मेरे परमेश्वर! मेरे अंदर खिन्न है मेरा प्राण;
7 आपके झरने की गर्जना के ऊपर से
8 दिन के समय याहवेह अपना करुणा-प्रेम प्रगट करते हैं,
9 परमेश्वर, मेरी चट्टान से मैं प्रश्न करूंगा,
10 जब सारे दिन मेरे दुश्मन
11 मेरे प्राण, तुम ऐसे खिन्न क्यों हो?