Salmos 41

HINCV

1 धन्य है वह मनुष्य, जो दरिद्र एवं दुर्बल की सुधि लेता है;

2 याहवेह उसे सुरक्षा प्रदान कर उसके जीवन की रक्षा करेंगे.

3 रोगशय्या पर याहवेह उसे संभालते रहेंगे,

4 मैंने पुकारा, “याहवेह, मुझ पर कृपा कीजिए;

5 बुराई भाव में मेरे शत्रु मेरे विषय में कामना करते हैं,

6 जब कभी उनमें से कोई मुझसे भेंट करने आता है,

7 मेरे समस्त शत्रु मिलकर मेरे विरुद्ध में कानाफूसी करते रहते हैं;

8 वे कहते हैं, “उसे एक घृणित रोग का संक्रमण हो गया है;

9 यहां तक कि जो मेरा परम मित्र था,

10 किंतु याहवेह, आप मुझ पर कृपा करें;

11 इसलिये कि मेरा शत्रु मुझे नाश न कर सका,

12 मेरी सच्चाई के कारण मुझे स्थिर रखते हुए,

13 सर्वदा से सर्वदा तक इस्राएल के परमेश्वर,

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